Tuesday, 27 October 2015

रंगीला राजस्थान - The colourful Rajasthan

रंगीला राजस्थान - The colourful Rajasthan



भारत एक बहुत ही खूबसूरत और विविधता भरा देश है, अपने आप में अनेकोनेक रंग समेटे हुए । अलग अलग तरह के धर्म, कई तरह की भाषाएं और विभिन्न राज्यों रूपी फूलों से जुड़कर बना एक सूंदर सा हार । जिसका हर राज्य इतिहास के पन्नों पर दर्ज है अपनी अपनी शौर्य गाथाओं से ओतप्रोत ।

ऐसे ही भारत के उत्तर पश्चिम में स्थित है महाराणा प्रताप की भुमी राजस्थान । जिसकी धरती से अनेकों वीर निकले थे जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं । आज भी राजस्थान के लोग गर्व और सम्मान के साथ उनकी गाथा गाते हैं ।

मैं भी राजस्थान के एक छोटे से कस्बे से हुं । राजस्थान के लोग अक्सर हर बात को हल्के फुल्के ढंग से ही लेते हैं । हंसी मजाक तो राजस्थानियों के रग रग में बसा है । कोई भी माहौल हो राजस्थानी उसमें से हास्य निकाल ही लेते हैं।

एक बार किसी मियां बीबी में किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया, मोहल्ले के बड़े बुजुर्ग दोनों को समझा रहे थे ।

"बेटा पति पत्नी परिवार नामक गाडी के दो पहिये होते है, एक भी पहिया ठीक से नहीं चले तो गाड़ी के चलने में मुश्किल हो जाती है"।

अब संयोग से लड़का थोडा दुबला पतला था और उसकी पत्नी थोड़ी भारी डीलडौल वाली। तो लड़के ने कहा



"काका बात तो आप री ठीक है, पर गाड़ी का एक पहिया साइकिल का अर एक जे ट्रक का होवे तो गाड़ी कैसे चलेगी"। सब हंस पड़े और उन दोनों में सुलह करा कर अपने अपने घर चले गए।

मौका अगर किसी शादी का हो तो फिर कहना ही क्या, ठहाकों से आसमान गूंजता रहता है । बात बात पर हंसी । चुटकुलों कहानियो का दौर चलता रहता है। ऐसे में एक 65-70 वर्षीय बुजुर्ग एक चुटकुला सुना रहे थे कि :

एक बार क्या हुआ एक गाँव में किसी लड़की की शादी थी ....और उस ज़माने में लड़की लड़कों का रिश्ता बड़े बुजुर्ग तय कर देते थे, जब बारात आती थी तब ही घर की औरतें लड़के को देख पाती थी।... तो जैसे ही बारात आई लड़की की माँ ने ज्यों ही दूल्हे को देखा तो अड़ गयी और उलाहने के साथ अपने पति से कहा,

"बिंद (दूल्हा) तो बुड्ढा है, मैं तो ना ब्याहुँ मेरी लड़की इसके साथ"।

मामला गड़बड़ हो गया । सब लड़की की माँ को समझा रहे थे । लड़की के पिता जो काफी देर से चुप थे वो बोले,

"अरी भागवान, जो फैसला करना है जल्दी कर, नहीं तो ये और बुड्ढा होता जा रहा है"

फिर तो पूरा शामियाना ठहाकों से हिल गया । थोड़ी देर बाद एक दूसरे बुजुर्ग ने हँसते हुए उनसे कहा,

"रे रतनलाल, इब तो सुधर जा तू, बुड्ढा हो गया है अब"

तो उन्होंने कहा "रे कान्हा, क्या बात करता है, राजस्थान में कोई बुड्ढे होते हैं कभी, सब भूतपूर्व नोजवान होते है" ।

उनकी ये बात सुनकर एक बार फिर ठहाके गूँज उठे।

राजस्थान के लोग जितने खुशगवार होते है उतने ही मिलनसार और अपने काम के प्रति भी कर्मठ होते है । ज्यादातर लोग अन्य राज्यों में जीविकोपार्जन हेतु जाते है और वहां की संस्कृति, वहां के लोगों में घुलमिल जाते हैं। लेकिन पहचाने मारवाड़ी के सम्बोधन से ही जाते हैं।

देश विदेश के कोने कोने में राजस्थानी रहते है । एक कहावत भी है की "जहाँ न जाए गाड़ी, वहां जाए मारवाड़ी।"

दान पुण्य के काम में भी मारवाड़ी आगे रहते है । जिसकी जितनी क्षमता होती है उस अनुसार सब समाज के उत्थान में अपना योगदान देते रहते है ।

आप कभी राजस्थान आयें तो एअरपोर्ट हो, रेलवे स्टेशन हो या बस स्टैंड । बाहर आपको स्वागत करता हुआ एक बोर्ड जरूर दिखेगा "पधारो म्हारे देस"।

ऐसा है मेरा राजस्थान, म्हारो रंगीलो राजस्थान । महान भारत भूमि का एक छोटा सा अंग । माँ भारती का दाहिना हाथ ।

अंत में ये कहते हुए आपसे विदा लेता हूँ ।

        "पधारो म्हारे देस"

......शिव शर्मा की कलम से....








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