Sunday, 25 October 2015

सपने - The Dreams

सपने - The Dreams


स्वर्णरथ पर बैठा मैं अपने आप को किसी  शहंशाह से कम नहीं समझ रहा था । रथ के पीछे लोगों का हुजूम चल रहा था और महाराज की जय के गगन भेदी नारे पुरे आसमान में गूँज रहे थे ।

तभी एक दरबारी ने आकर कहा की रानी रूपकंवर जी मुझे रनिवास में बुला रही है ।

रूपकंवर से कुछ समय पूर्व ही मेरा विवाह हुआ था । पडोसी राज्य की राजकुमारी थी वो, और अत्यंत सूंदर थी । कल किसी बात पर उनसे मेरा झगड़ा भी हो गया था और वो मुझसे रुष्ट थी,  फिर भला मैं इस बुलावे को कैसे टाल सकता था इसलिए शोभा यात्रा को बीच में ही छोड़ कर मैं महल में चला आया ।

पर ये क्या? रूपकुंवर के साथ उसके पिताजी और भाई भी कक्ष में बैठे कुछ चर्चा कर रहे थे । मुझे देख के बोले "आइये महाराज, सुना है आज कल काफी शक्तिशाली हो गए हो जो स्त्रियों को अपनी शक्ति दिखाते हो, हमें रूपकंवर ने सब बता दिया है इसलिए हम इसे अपने साथ वापस ले जा रहे हैं, अब ये आपके साथ नहीं रहेगी ।

मैं हक्काबक्का हो गया और हाथ जोड़कर अपने स्वसुर महाराज से क्षमा मांगने लगा । पिताश्री मुझे क्षमा कीजिये, रूपकंवर को यहाँ से मत ले जाइए । हम इनसे बहुत प्रेम करते है । कल गलती से हम क्रोधित हो गए थे और रूप को उल्टा सीधा बोल दिया था मगर हम आप से वादा करते है भविष्य में ऐसा दुबारा नहीं होगा, कृपा करके आप रूप को यहाँ से मत ले जाइए ।

लेकिन उन्होंने मेरी एक ना सुनी और रूप को लेकर कक्ष से निकल गए, मैं रूप रूप चिल्लाता उनके पीछे भागा तथा दरवाजे की चौखट से टकराकर लड़खड़ा कर गिर पड़ा........

अचानक मेरी आँख खुल गयी और मैंने पाया की मैं सचमुच लुढ़ककर बिस्तर से निचे गिरा पड़ा था।

बताते बताते दीपक हंस पड़ा और उसके साथ साथ हम भी हंस पड़े । सचमुच दीपक, बड़ा मजेदार सपना था । सपने में ही सही तू राजा तो बन गया, हाहाहाहाहा । हँसते हँसते मुकेश बोला ।

सच में दोस्तों, सपने कितने अजीब होते है । हमें वो दिखा देते है जो वास्तविकता में हमसे कोसों दूर होता है । जो कुछ हम सपने में देखते है वह शायद कभी हमने "सपने" में भी नहीं सोचा होगा ।

सपनों में कुछ लोग विदेशों की सैर कर आते हैं, कुछ अपने प्रेमी प्रेमिका से उसके और अपने माता पिता की मर्जी से शादी के बंधन में बंध जाते हैं । कुछ तो सपनों में अपने मनपसंद फिल्मो के हीरो हिरोइन के साथ उन्ही की डाइनिंग टेबल पर उनके साथ बैठकर लंच डिनर कर आते है । अपना बचपन वापस जी लेते है, सपने में अपना बुढ़ापा भी देख लेते है।

वाकई, बड़ी खूबसूरत और अजीबोगरीब दुनिया है सपनों की । हमें पंख लग जाते है और कुछ ही समय में हम पूरी दुनिया की सैर कर आते है ।

परंतु सपने तो सपने ही हैं । मजा तो तब आये जब हम इन सपनों को अपनी मेहनत और लगन से साकार कर लें, इन्हें सच बना लें । सपने देखना भी जरुरी है क्योंकि सपने देखेंगे तभी तो हम उन्हें पूरा करने का प्रयास करेंगे । और निश्चित ही हम ये कर भी सकते हैं अगर अपने मन में ठान लें । आपने भी कई सपने देखे और पुरे किये होंगे ।

वैसे जागती आँखों से देखे गए सपने अक्सर इंसान पुरे कर लेता है, अतः सपने देखिये, जागती आँखों से सपने देखिये और लगा दीजिये अपना पूरा जोर उन्हें पूरा करने में ।

माननीय कलाम साहब ने भी कहा था की सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने तो वो है जो हमें सोने ना दे।

कलाम साहब को सादर नमन करते हुए अभी के लिए विदा चाहूंगा । जय हिन्द मित्रों । फिर मिलेंगे ।

....शिव शर्मा की कलम से....




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