Thursday, 29 October 2015

पसंदीदा कार्यक्रम - The favourite TV Program

पसंदीदा कार्यक्रम

शनिवार का दिन था । मैं अपने दफ्तर में बैठा रोजमर्रा के काम सलटा रहा था तभी फ़ोन पर "मेरे देश की धरती" गाने की धुन बजी, जो मैंने अपने फोन की रिंगटोन सैट कर रखी थी । परदेस में देशप्रेम वाले गाने की धुन भी अच्छी लगती है ना ।

मेरे परिचित मयूर भाई (काल्पनिक नाम) का फ़ोन था । भारत में राजस्थान के रहिवासी मयूर भाई के बारे में प्रसिद्द था कि वो बहुत ही "पकाऊ" आदमी है, शुरू हो जाता है तो बिना ब्रेक की गाड़ी की तरह रुकता ही नहीं है । फिर भी मेरी वीरता देखिये, मैंने "साहस" करके फ़ोन उठा लिया ।

"हैलो शिव भाई, कैसे हो"उधर से आवाज आई।

"अच्छा हूं मयूर भाई प्रभु की कृपा से, आप बताइये, कैसे हैं और आज हमारी याद कैसे आई" मैंने जवाब दिया ।

"अजी याद तो रोज ही करते हैं बस फ़ोन वगैरह नहीं कर पाते, काम बहुत रहता है"

"कोई बात नहीं मयूर भाई बस याद करते रहें यही काफी है, बताइये क्या सेवा करूँ"

"सेवा कैसी शिव भाई, आज शनिवार था और हमारा टेलीविजन दुर्भाग्यवश ख़राब हो गया है, आपने वो भारतीय चेन्नल्स वाला केबल कनेक्शन ले रखा है ना? ये ही पूछना था ।"

"जी हां" मैंने बताया ।

"उसमें सोनी टी वी भी आता है ना?"

मेरी इच्छा हुयी दीवार से सर फोडलुं, अब हिंदी चैनल वाला कनेक्शन है तो सोनी टी वी तो प्रायः सभी केबल कंपनियां अपनी सूचि में रखती है। फिर भी मैंने जवाब दिया "जी हां मयूर भाई, सोनी भी आता है।"

"अरे वाह शिव भाई, आपने तो निहाल कर दिया, मुझे वो बच्चों के गाने वाला जो इंडियन आइडल नाम का प्रोग्राम आता है, बहुत अच्छा लगता है"।

"हां जी, वो तो वाकई अच्छा आता है, हम भी देखते हैं"

"वही तो, अब अगर आपको आपत्ति ना हो तो मैं शाम को आपके घर आ जाऊं, हमारा टी वी ख़राब है और मैं उसे देखे बिना छोड़ना नहीं चाहता।"

"लेकिन वो कार्यक्रम तो दस बजे आता है मयूर भाई । फिर चलता भी 1 घंटा है, आपको देर नहीं हो जायेगी वापस जाते जाते?" मैंने बचने की कोशिश करने वाला सवाल किया ।

"देर काहे की शिव भाई, कल तो सन्डे है, फुल्ल आराम का दिन, आप वो चिंता छोड़िये, तो मैं कल आ रहा हु ठीक पौने दस बजे"।

उन्होंने अपना निर्णय स्वतः ही सुना दिया तो औपचारिकतावश मुझे हां तो कहनी ही थी।

फ़ोन काट कर जल्दी जल्दी काम ख़त्म करके मैं करीब 7.30 बजे घर आया । और मेरे साथ उसी घर में रहने वाले मेरे सहकर्मी विनोद को इस बारे में बताया । उसने भी माथा पकड़ लिया और कहा "अब तो देख लिया प्रोग्राम, वो मयूर भाई है भैया । अब तो आज उसी का प्रोग्राम देखो"

मैं मुस्कुराकर तरोताजा होने अपने कमरे में चला गया । फिर कुछ देर बाद हमने खाना खाया और टी वी देखने बैठ गए । ये हमारी रोज की दिनचर्या है, शाम को दफ्तर से आने के बाद भोजनोपरांत कुछ देर टेलीविजन में कोई पसंदीदा सीरियल और समाचार वगैरह देखना ।

ठीक पौने दस बजे मयूर भाई आ गए । समय की उनकी पाबंदता वाकई तारीफ के काबिल निकली । हेलो हाय के आदान प्रदान के बाद वो सोफे पर जम गए । कुछ देर बाद इंडियन आइडल शुरू हो गया..... और मयूर भाई भी।

"मैं ये प्रोग्राम शुरू से देखता आ रहा हूं विनोद भाई, एक भी दिन मिस नहीं किया, आज हमारा टी वी ख़राब हो गया तो शिव भाई ने कहा हमारे यहां देख लेना"।

"हां तो क्या फर्क है मयूर भाई, ये भी तो आपका ही घर है" विनोद ने व्यवहार सुलभ जवाब देकर बात को टालने की "असफल" कोशिश की।

वो विनोद को बता रहे थे और मैं आश्चर्य चकित था कि उनको न्योता मैंने दिया था? तब तक एक लड़की गाना गा चुकी थी । बहुत सूंदर गाया था उसने मगर हमारा आधा ध्यान तो मयूर भाई ने अपनी और आकर्षित कर रखा था। खैर वो हमारे मेहमान थे और मेहमान तो......।

फिर राजस्थान का एक जूनियर मंच पर आया, उसने जैसे ही " ठरकी छोकरो"  गाना शुरू किया उधर मयूर भाई,

" मैं जानता था शिव भाई आज ये यही गाना गाने वाला है, पिछले हफ्ते इसने वो वाला गाना गाया था जो बड़े बड़े गायकों के लिए गाना मुश्किल है, उसके पिछली बार तो कितना मुश्किल वाला गाना था वो। देखना, एक दिन ये लड़का बहुत आगे जाएगा"। अब राजस्थानी आदमी राजस्थानी कलाकार की तारीफ़ ना करे ऐसा भला हो सकता है?

फिर और जितने भी जूनियर गाने आये उनका भी पूरा भूत, वर्तमान और भविष्य हमने मयूर भाई के अथाह ज्ञान की बदौलत जाना और कृतार्थ होते रहे ।

इसी तरह का अपना ज्ञान मयूर भाई अगले एक घंटे तक हमें बांटते रहे और हम अपने धैर्य पर पूर्ण नियंत्रण के साथ मुस्कुरा मुस्कुरा कर ज्ञान रस पीते रहे।

उस एक घंटे के दौरान कभी कभी हम टी वी को "भी" देख रहे थे ।

इस बीच में हमने चाय के गुणों के बारे में भी मयूर भाई से जाना और कार्यक्रम के अंतराल में चाय के शौकीन मयूर भाई के साथ विनोद द्वारा बनाई चाय की चुस्कियां भी ली ।

करीब सवा ग्यारह बजे मयूर भाई जब विदा हुए तो गुनगुने पानी के साथ एक एक सेरिडोन की गोली लेकर अपने अपने कमरों में सोने चले गए । ये अलग बात है की नींद एक डेढ़ बजे ही आई ।

मैं आपको राय देना चाहूंगा की कभी मयूर भाई का फ़ोन आये तो एक तो ये मत कहना कि आप भी फलां फलां कार्यक्रम को पसंद करते हैं और दूसरा ये कि आपके टी वी में उनके प्रोग्राम वाला चैनल आता है ।

आप सभी को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ प्यार भरा नमस्कार । फिर मिलेंगे । जय हिन्द।

आत्मविश्वाश - Self Confidence


....शिव शर्मा की कलम से....



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