Saturday, 9 January 2016

Tum Na Badalna


तुम ना बदलना (एक ग़ज़ल)


कम हो जाता है किसी को बताने से
तकलीफ देगा दर्द, दिल में छुपाने से

घर की बात घर में रहे तो अच्छा है
उम्मीद ना करना सुलह की, जमाने से

नाराजगी अक्सर बढाती है दूरियां
सुलझ जाते हैं मसले कई, मुस्कुराने से

छोड़ जाए कोई हमदर्द जो रूठकर
मना लेना उसे, किसी भी बहाने से

मजा तो तब है बिखरा दो मुहब्बतें
सुकूं मिलता नहीं, किसी को सताने से

वक्त के साथ बदल जाता है बहुत कुछ
तुम ना बदलना, वक्त बदल जाने से

बरसात होगी ही कोई जरुरी तो नहीं
आसमान में महज, घटा छा जाने से


रुसवा जो करदे भरी महफ़िल में
बचके रहना, ऐसे हर अफ़साने से

आसान हो राह तो बहक जाते हैं लोग
अक्ल आती है अक्सर, ठोकर खाने से

वक्त आने से सामने आ ही जाते हैं
गुनाह छुपते नहीं कभी, छुपाने से

आसां हो जायेगा सफ़र जिंदगी का
बढा लो पहचान हर अनजाने से

बीच राह में थक कर कहीं रुक ना जाना
मिल जाती है मंजिल, चलते जाने से

दिल के रिश्ते "शिव" संजो के रखना
किस्मत से मिलते है ये, खुदा के खजाने से

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....शिव शर्मा की कलम से...






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