Wednesday, 13 April 2016

Sanyog - संयोग



संयोग (भाग-1)

"अरे बहु जल्दी करो, देर हो रही है, लड़की वाले इंतजार कर रहे होंगे ।"

"जी माँजी, बस दो मिनट" मां ने आवाज लगाई तो अजय की भाभी ने जवाब दिया । आज दोनों सास बहु अजय के लिए लड़की देखने जा रही थी । अजय की उम्र करीबन 28 वर्ष हो चुकी थी और अब सबको ऐसा लगने लगा था की जल्दी ही कहीं रिश्ता हो जाए और अजय की शादी हो जाए ।

ऐसा नहीं था की इस से पहले उन लोगों ने कोई रिश्ता नहीं देखा था, लेकिन कहते हैं ना जोड़े तो ऊपर से बन कर आते हैं, तो जो लड़की अजय के लिए या जिस लड़की के लिए अजय को ईश्वर ने बनाया था वो शायद उन चार पांच लड़कियों में नहीं थी, जो वे अब तक देख चुके थे और उनमें से अजय के लिए उसके परिवार वालों को अब तक कोई नहीं जची थी ।


अजय एक इंजिनियर था और दुबई में किसी अच्छी कंपनी में पिछले चार साल से अच्छे पद पर काम कर रहा था । तनख्वाह भी अच्छी खासी थी लेकिन पता नहीं क्यों, अब तक शादी के लिए कोई लड़की नहीं मिली थी । शायद संजोग नहीं बैठ रहा था । कोई उम्र में कम ज्यादा थी तो किसी का कद आड़े आ जाता था । जैसे एक लड़की सबको पसंद आई थी परंतु उसकी लंबाई अजय से ज्यादा थी । एक रिश्ते को तो माँ ने ये कह कर मना कर दिया था की लड़की बोलती बहुत है ।

अभी अजय छुट्टियों में आया हुआ था एवं उसके किसी परिचित ने पास के शहर में एक शादी योग्य लड़की माँ को बताई थी और कहा कि "देख लीजिये, संयोग बन जाए तो लड़के का रिश्ता कर दो । वैसे मैं लड़की के बारे में ज्यादा नहीं जानता हुं, वो आपको ही देखना है, लेकिन उसके पिता को जानता हुं, अच्छे व्यक्ति है ।"

उन्होंने बताया था कि लड़की सूंदर है, सुशील है, और गृहकार्यों में भी दक्ष है । उसे ही देखने वे लोग आज जा रहे थे ।

"चलिए माँजी" भाभी हाथ में बैग थामे आई तो माँ ने बैग के बारे में पूछा ।

"इसमें शगुन के हिसाब से लड़की के लिए कपड़े इत्यादि लिए है माँजी, यदि हमें और अजय को लड़की पसंद आ गयी तो आज ही हम शगुन कर आएंगे ।" भाभी ने मुस्कुरा कर कहा तो माँ ने भी मुस्कराहट के साथ स्वीकारोक्ति वाले अंदाज में गर्दन हिला दी ।

पिताजी का आज स्वास्थ्य थोड़ा ख़राब था अतः माँ, भाभी, भैया और अजय तक़रीबन सवा घंटे का सफ़र तय करके लड़की वालों के यहाँ पहुँच गए । औपचारिकताओं के आदान प्रदान के बाद अजय की माँ ने लड़की को बुलाने के लिए कहा ।


लड़की की कद काठी ठीक थी, सूंदर भी थी किन्तु यहां भी उम्र आड़े आ गई । वो अभी महज 19 वर्ष की ही थी यानि अजय से नो साल छोटी ।

"देखिये हमें आपका घर परिवार, बच्ची, सब अच्छे लगे" भैया ने लड़की के पिता से कहा, "परंतु उम्र में नो वर्ष का अन्तर बहुत ज्यादा होता है, इसलिए हमें क्षमा करें ।"

"जी ये तो जोग संजोग की बात है और हमारी भी गलती ये हो गयी कि हमने दोनों ने लड़के लड़की की उम्र के बारे में जिक्र ही नहीं किया ।" लड़की के पिता ने कहा । "खामखाह ही आपको इतनी परेशानी उठानी पड़ी, कृपया हमें क्षमा करें ।"

"चलो इस बहाने अपनी जान पहचान तो हुई और आपसे थोड़ी आवभगत भी करवाली" भैया ने हँसते हुए उनसे कहा तो वे भी हंस पड़े ।

कुछ समय पश्चात् अजय और परिवार वापस अपने घर के रास्ते पर थे ।

"अजय तू एक काम कर, छोड़ ये इंजीनियरिंग और सन्यासी बन जा, इतनी लड़कियां देख ली पर तेरे जोड़ की नहीं मिली" भाभी ने ठिठोली की तो अजय के साथ सब हंस पड़े ।

"हाँ भाभी, मैं भी कुछ ऐसा ही सोच रहा था ।" अजय ने हँसते हुए कहा तो एक बार फिर सब हंस पड़े ।

रास्ते भर इसी तरह की हंसी मजाक करते हुए वे वापस अपने घर पहुँच गए ।

कुछ दिन बाद अजय की छुट्टियां खत्म हो गयी और वो वापस अपनी कर्मभूमि दुबई चला गया । उसकी सगाई का कोई संयोग इस बार भी नहीं बन पाया ।

समय गुजरता गया । दीवाली आने वाली थी । घर में दीवाली की साफ़ सफाई भी शुरू हो चुकी थी । एक दिन भाभी अपने कमरे की अलमारी की सफाई कर रही थी । अलमारी में पुराने बिछाये हुए अखबार निकाल कर वहां नए अखबार बिछा रही थी तभी अजय की छोटी बहन अनु, जो आज ही मायके आई थी, ने कहा, "भाभी, ये देखो तो ।"

वो अलमारी से अभी अभी हटाये हुए एक पुराने अखबार को भाभी के सामने ले आई, जिसके वर वधु कॉलम में वर चाहिए वाली जगह किसी लड़की का संक्षिप्त विवरण और नाम पता, फ़ोन नंबर इत्यादि थे । वो लड़की उन्ही के जाती बिरादरी की थी ।

लेकिन ये तो पांच महीने पुराना विज्ञापन है । भाभी ने कहा ।

"तो क्या हुआ............

........ मित्रों क्षमा चाहूंगा, ब्लॉग थोड़ा बड़ा हो रहा है अतः इसे हम 2 भाग में प्रस्तुत करेंगे । ज्यादा इन्तजार नहीं करवाऊंगा आपसे, दूसरा भाग हम आपके लिए कल ही लेकर आ रहे हैं । तब तक आप बताइये की भाग 1 आपको कैसा लगा । भाग 2 में आप जानेंगे कि वो विज्ञापन देख कर अजय के परिवार ने क्या किया, अजय के रिश्ते का संयोग बना या नहीं । पुनः एक बार आपकी असुविधा के लिए खेद प्रकट करते हुए आपसे विदा चाहूंगा ।

Click here to read "जनम जनम का साथ" written by Sri Shiv Sharma


जय हिन्द

***शिव शर्मा की कलम से***









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1 comment:

  1. Sharma Ji, Very Interesting, Waiting for the 2nd Part.

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