Thursday, 4 August 2016

Hawa Desh Ki - हवा देश की


हवा देश की- Hawa Desh Ki




मैं हवा तुम्हारे देश की, तुमसे बातें करने आई हूं,
लेकर खुशबु उस मिट्टी की, यहां बिखरने आई हूं,

परदेस में आकर बस तो गए पर याद वतन भी आता होगा,
मन के गगन पर उन यादों का बादल भी मंडराता होगा,

तन्हाइयों में दिल में तेरे, शायद खयाल ऐसा ही होगा,
मैं जैसा छोड़ के आया था, क्या देश मेरा वैसा ही होगा,

क्या अब भी सवेरे पेड़ों पर पंछी कलरव करते होंगे,
क्या अब भी खेतों में चारा वो ऊंट बैल चरते होंगे,

क्या अब भी सवेरे मां मेरी, देवालय को जाती होंगी,
क्या अब भी दादी माँ घुटनों पर, सरसों तेल लगाती होंगी,




दादाजी के लिए पिता, अखबार अभी भी लाते होंगे,
उनसे मिलने वाले मेरे, घर पर अब भी आते होंगे,

हर शाम को फुरसत के पल में सब सरवर पर मिलते होंगे,
सुख दुःख सबके बंटते होंगे, चेहरे सबके खिलते होंगे,

जब शाम के वक्त मुहल्ले के बच्चे स्कूल से आते होंगे,
गली में सारे अब भी पहले जैसा शोर मचाते होंगे,

अब भी कोई बूढ़ी नानी, घर पर सबके जाती होंगी,
गली की महिलाओं को कोई, व्रत की कथा सुनाती होंगी,

सावन के महीने में अब भी, झूले बागों में पड़ते होंगे,
पहले मैं पहले मैं करते, बच्चे अब भी झगड़ते होंगे,




होली दीवाली ईद के उत्सव, मिलकर सभी मनाते होंगे,
नाचते होंगे गाते होंगे, छककर मीठा खाते होंगे,

हां याद वतन की आती है, दिल में अब भी है देश बसा,
तुम उसी देश से आई हो, क्या क्या बदला है वहां बता,

क्या अब भी वही चंदा सूरज क्या अब भी वही सितारे हैं,
ऐ मेरे वतन की हवा बता क्या अब भी वही नज़ारे हैं,

ओ मेरे परदेसी बाबु, कुछ बातें तुम्हें बताती हुं,
यादों की नाव पर कर सवार तेरे देश तुम्हें ले जाती हूं,



चाँद सितारे वही है लेकिन समय जरा सा छल गया है,
वक्त बड़ी तेजी से अपने साथ बहुत कुछ बदल गया है,

पंछी कलरव करते परंतु गिनती में कुछ घट गए हैं,
कुछ मकां पुराने हट गए हैं, कुछ पेड़ वहां से कट गए हैं,

छोटे बड़े कुछ व्यस्त हो गए फुर्सत कम ही मिलती है,
हां लेकिन मुस्कान अभी भी कुछ चेहरों पर खिलती है,

झूले भी पड़ते हैं बाग़ में, मोर नृत्य भी करते हैं,
कुछ कम करते हैं लेकिन, बच्चे शोर अभी भी करते हैं,

नानी ज्यादा चल नहीं सकती अब घर पर ही रहती है,
बच्चे वहां आ जाते वो परियों की कहानी कहती है,



तेरी याद में बूढ़ी हो गई माँ, अब मंदिर जा ना सकती है,
दादी संग बैठी दरवाजे पर राह तुम्हारी तकती है,

होली दिवाली ईद सभी अब फीके फीके लगते हैं,
एक दिन बेटा आएगा, पापा दादा से कहते हैं,

मैं जानती हूं तू एक दिन प्यारे, लौट के वापस आएगा,
वो देश तुम्हारा अपना है, जा तुझको गले लगायेगा ।।

* * * *

जय हिंद



*शिव शर्मा की कलम से***







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