भुला ना पाओगे
अंदाज मुहब्बत का कुछ इस कदर रखता हुं
अपने चाहने वालों के दिलों में घर रखता हुं,
जो भी मिलता है अपना बना लेता है मुझे,
बस मुस्कुरा के बात करने का हुनर रखता हुं,
मशरूफ हो कर तुम कहीं भूल ना जाओ मुझे
नादां हुं, बेवजह ही दिल में ये डर रखता हुं,
खुदा मेरे अपनों की हर दुआ क़ुबूल कर लेना
यही तमन्ना ले तेरे सजदे में सर रखता हुं,
डरता हुं कभी मुझसे कोई चुरा ना ले कहीं
इसीलिए तुम्हें अपने दिल में छुपाकर रखता हुं,
बरक़रार रहे तुम्हारी जिंदगी की राहों में उजाले
रौशनी के लिए अपना जिगर जलाकर रखता हुं,
यकीं है कि तुम खुद का ख़याल रखते हो
फिक्र जरुरी तो नहीं, मगर रखता हुं,
चाहकर भी तुम कभी मुझे भुला ना पाओगे "शिव"
अपनी चाहत में इबादत सा असर रखता हुं ।।
* * *
नमस्कार मित्रों । कल फिर मिलते हैं, एक नयी भावुक कहानी लेकर । तब तक के लिए अलविदा ।
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जय हिन्द
***शिव शर्मा की कलम से***
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Very nice
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