Thursday, 19 May 2016

Tumhari Yaade


TUMHARI YAADE - तुम्हारी यादें


नमस्कार दोस्तों । कल युं ही घर पर बैठा पुराने कागजातों को देख रहा था तो नजर पड़ी सन् 2007 में लिखी इस ग़ज़ल पर, सोचा आपके साथ इसे साझा कर लेता हुं ।

उम्मीद है आपको ये ग़ज़ल भी पसंद आएगी ।




तुम्हारी यादें
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क्या कहुं कितना सताती है तुम्हारी यादें,
हर वक्त तुम्हारी याद दिलाती है तुम्हारी यादें

दिन तो गुजर जाता है जीवन की भागदौड़ में
शाम ढलते ही, आ जाती है तुम्हारी यादें,

यूं तो गुजर जाते है तूफ़ान भी हवा की तरह
पुरवाई चलते ही, आ जाती है तुम्हारी यादें,



बहुत समझाता हुं समझता ही नहीं दिल,
और जरा समझते ही, आ जाती है तुम्हारी यादें,

बदल तो डालूं यादों के इस मौसम को मगर,
मौसम बदलते ही, आ जाती है तुम्हारी यादें,

तन्हाइयों में तो जाहिर है सताती ही रहती है,
महफ़िलें सजते ही, आ जाती है तुम्हारी यादें,

नींद आती नहीं और ख्वाबों पे कब्ज़ा तेरा
आँख लगते ही, आ जाती है तुम्हारी यादें,

लोग कहते हैं "शिव" कुछ लिखा करो,
कलम पकड़ते ही, आ जाती है तुम्हारी यादें ।।



कल फिर एक छोटी सी ग़ज़ल के साथ मिलते हैं दोस्तों ।

जय हिन्द











***शिव शर्मा की कलम से***

आपको मेरी ये रचना कैसी लगी दोस्तों । मैं आपको भी आमंत्रित करता हुं कि अगर आपके पास भी कोई आपकी अपनी स्वरचित कहानी, कविता, ग़ज़ल या निजी अनुभवों पर आधारित रचनायें हो तो हमें भेजें । हम उसे हमारे इस पेज पर सहर्ष प्रकाशित करेंगे ।.  Email : onlineprds@gmail.com

Click here to read "तुम ना बदलना" Written by Sri Shiv Sharma


धन्यवाद

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