Friday, 6 November 2015

शिकायतें - Complaints

शिकायतें - Complaints / Grievances


"अरे यार ये लाइट को क्या हो गया, इसे भी आज ही जाना था ? पुरे मैच का मजा किरकिरा हो गया ।" मिश्राजी की शिकायत भरी आवाज दूसरी मंजिल से सुनाई दी । अभी अभी बिजली चली गयी थी और भारत पाकिस्तान का मैच न देख पाने की पीड़ा मिश्राजी के स्वर में घुली हुयी थी ।

"शर्माजी आपके घर में लाइट है क्या?" मिश्राजी ने ऊपर से ही आवाज लगायी ।

"नहीं मिश्राजी" मैंने जवाब दिया, "शायद पुरी कॉलोनी की गयी है, आजु बाजू की बिल्डिंग वाले भी बेचैन नजर आ रहे हैं"।

"यार ये बिजली सप्लाई वाले भी कमाल करते हैं शर्माजी, उन्हें आज ही का दिन मिला था बिजली काटने को? इतना अच्छा मैच चल रहा था, 18 गेंद में 24 रन बनाने थे भारत को । तीन ओवर और रुक जाते तो क्या बिगड़ जाता इनका। जब भी हमें जरूरत होती है बिजली काट देते हैं ।" बोलते बोलते मिश्राजी निचे आ चुके थे ।

"आ जायेगी मिश्राजी काहे चिंता कर रहे हैं, रही बात मैच की तो वो तो हम जीत ही जाएंगे, अपने दोनों बल्लेबाज मंजे हुए और अच्छी तरह जमे हुए हैं। आइये चाय पीते हैं।" मैंने मिश्राजी को सांत्वना देने की कोशिश की । लेकिन मिश्राजी शालीनता से चाय के लिए मना करके सीढ़ियों से निचे की और चले गए ।

मैं सोचने लगा । आज से पहले बिजली शायद 7-8 महीने पहले कोई ग्रिड फेल हो गया था तब गयी थी । तो क्या मिश्राजी को पिछले 7-8 महीने में बिजली की जरुरत महसूस नहीं हुयी थी । सिर्फ आज ही जरुरत थी क्योंकि एक रोमांचक मैच आ रहा था ।


कई लोगों के मुंह से आपने भी कई बार सुना होगा ।"यार ये सरकार काम की नहीं है । पिछले तीन महीने से गली की सड़क टूटी पड़ी है, कोई सुध लेने वाला भी नहीं है ।" अब अगर उन महाशय से पूछेंगे की आपने इसकी सुचना किसी को दी क्या? तो उनका जवाब होगा "अजी, सुचना क्या देना, ये तो सरकार का काम है, उन्हें खुद देखना चाहिए।"

हम भी कई बार कभी सरकार में कभी सरकारी सुविधाओं में कमियां निकालते ही रहते हैं । ट्रेन में भीड़ बहुत है, डिब्बा छोटा है, मोहल्ले की नालियां बह रही है, नुक्कड़ पर गंदगी का ढेर लगा है, आदि आदि ।

देखा जाए तो हमें आदत सी हो गयी है शिकायते करने की । पिछले 8 महीने से लाइट नहीं गयी तो हम बिजली विभाग का आभार नहीं मानेंगे, लेकिन एक दिन किसी वजह से चली गयी तो कोसना शुरू । कई सारी सरकारी सुविधाओं का लाभ हम रोज उठाते हैं उनका शुक्रिया सरकार को नहीं देंगे, लेकिन ट्रेन अगर लेट हो गयी तो रेलवे डिपार्टमेंट को मिनटों में नाकारा साबित करने की होड़ में लग जाएंगे ।

नालियां बह रही है तो वजह नहीं ढूंढेंगे कि हम में से ही किसी ने नालियों में प्लास्टिक की थैलियां या कोई और तरह का कूड़ा फेंका होगा, तभी वो अवरुद्ध हुयी होगी, लेकिन नगरपालिका को कुसूरवार ठहरा कर हम अपने कार्य की इतिश्री कर लेते हैं।

नुक्कड़ पर जो कचरे का ढेर है वो अपने आप तो बना नहीं, और लगा किसकी वजह से है ये भी हम जानते हैं, हो सकता है शायद उस ढेर को बड़ा करने में थोडा बहुत सहयोग हमने भी वहां कचरा फेंक के किया हो, मगर दोष सारा मढ़ देंगे क्षेत्र के विधायक या सरकार के माथे ।

दोस्तों सिर्फ शिकायतें करते रहने से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता ।अधिकतर समस्याएं तो हम खुद ही लापरवाही या अनजाने में खड़ी कर लेते हैं, जैसे वो कचरे का ढेर, और बाद में उसका सारा दोष किसी और पर डाल देते हैं।

सरकार और सरकारी कर्मचारियों के पास अन्य भी कई तरह के काम के बोझ होते हैं ।उन पर दोषारोपण करने की बजाय अगर हम सब मिलकर प्रयास करें, कि इस तरह की समस्याएं ना हो, तो ही कुछ हो सकता है ।

जैसे जरुरत ना हो तो बिजली का दुरुपयोग ना करें। कूड़ा कर्कट यहां वहां ना फेंके । सड़कों पर ना थूकें, उन पर खड्डे ना करें । नालियों में किसी तरह की कोई वस्तु न डालें, तो हम कई तरह की परेशानियों, और बिमारियों से भी, बच सकते हैं ।

सो आज से ही प्रण करें कि हम अपने आसपास इस तरह की लापरवाही नहीं करेंगे और किसी को अगर ऐसा करते देखेंगे तो उन्हें समझायेंगे, रोकेंगे ।

कल फिर मिलेंगे । जय हिन्द

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...शिव शर्मा की कलम से...







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