Tuesday, 17 November 2015

मुफ़्त का चन्दन - Muft ka Chandan

मुफ़्त का चन्दन -  Muft ka Chandan


दीपावली के शुभ अवसर पर भारी छूट । 5 शर्ट की खरीददारी पर एक शर्ट फ्री फ्री फ्री । ईद के मुबारक मौके पर नायाब तोहफा, दो जीन्स के साथ एक नक्काशीदार कुरता बिलकुल मुफ़्त । नव वर्ष को रंगीन बनाएं, फलां फलां कंपनी का टेलीविजन खरीदिए और एक साउंड सिस्टम मुफ़्त ले जाएं ।

अक्सर हर त्योंहार पर ये विज्ञापन हम सब देखते हैं और आकर्षित भी हो जाते हैं तभी तो कई दफा इसका "फायदा" भी उठाते हैं । साथ में "मुफ़्त" की चीज जो मिल रही है । लेना साउंड सिस्टम था, लेकिन वो टी वी के साथ फ्री मिल रहा है इसलिए टी वी भी उठा लाएंगे । साउंड सिस्टम मुफ़्त का हो गया ।

बड़ा मजा आता है । मुफ़्त की चीज  लगती भी प्यारी है । रेस्टॉरेन्ट में आर्डर दे के जो पनीर की सब्जी मंगवाते है उस से कहीं ज्यादा उसके साथ जो निम्बू मिर्च का आचार फ्री मिलता है वो स्वादिष्ट लगता है । डोसा इडली तो हम चटनी और सांभर के लिए खाते हैं ।

बचपन में कटी पतंगों के पीछे क्या भागते थे हम । छत से छज्जे पर और छज्जे से सीधे जमीन पर जो जम्प लगायी जाती थी वैसी जम्प तो ओलंपिक में भी नहीं लगती होगी । फिर अगर बीसियों और प्रतिस्पर्धियों से आगे जाकर वो पतंग लूटने में सफल हो जाते थे तो अपने आपको किसी वर्ल्ड चैंपियन धावक से कम नहीं समझते थे । और बबल गम इसलिए खरीदते थे क्योंकि उसके साथ एक टैटू मुफ़्त मिलता था ।

अच्छे व्यापारी और कंपनियां जानती है की ग्राहक "मुफ़्त" शब्द सुनके खींचे चले आते हैं । कानों में शहद सा घुल जाता है ये शब्द सुनके । एक कहावत भी है ना "मुफ़्त का तो ज़हर भी अच्छा"।

मोबाइल कंपनियां भी इस लुभावने शब्द मुफ़्त को अच्छी तरह भुनाती है । सौ रुपये का रिचार्ज करवाने पर दो सौ एम बी इंटरनेट डेटा मुफ़्त । भले ही उन मुफ़्त के डेटा से इंटरनेट चले या ना चले । पर मुफ़्त शब्द के मायाजाल का जादू ऐसा फैलता है कि फ़ोन धनाधन रिचार्ज होने लगते हैं ।

कहीं पर कोई मुफ़्त वाली योजना ना भी हो तो भी होशियार ग्राहक कुछ ना कुछ मुफ़्त का माल ले ही आते हैं । "क्या बाबू, 1500 रुपये के कपड़े ख़रीदे हैं, कम से कम एक वो चैन वाला थैला तो दो।" या "क्या भैया, इतनी सब्जी ली है तुम्हारे ठेले से, थोडा कढ़ी पत्ता तो दो।"

छोटे से लेकर बड़े आदमी तक, सबको मुफ़्त वाली चीज मिलने पर एक अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है । चार लोग जब नई चीज ख़रीदी के बारे में बातें करते है तो उस मुख्य वस्तु की बजाय मुफ़्त वाले सामान की ज्यादा इज्जत होती है । घर पर भी उसकी ही सार संभाल ज्यादा होती है । टी वी बेचारा मुंह लटका के दीवार पर टंगा रहता है । और साउंड सिस्टम को रोज अगरबत्ती की जाती है ।

आजकल व्हाट्सएप फेसबुक पर भी अक्सर कुछ मेसेज घुमते रहते हैं । "ए बी सी नेटवर्क की देश की सबसे तेज 100 mbps की 4g सेवा शुरू, "डब्लू डब्लू डब्लू डॉट मुफ़्त का माल डॉट कॉम" बिना लिंक खोले ये मेसेज तीन ग्रुप में भेजें । आपको 4g का 50mb डेटा मुफ़्त मिलेगा ।

देखते ही देखते ये मेसेज देश की सीमाएं लांघ कर विदेशों तक पहुँच जाता है । बाद में सब मोबाइल में नजरें बिछाए 50mb वाली मिठाई का इंतजार करते नजर आते हैं । 50 तो क्या 5 भी नहीं आता । आशा राजभोग की थी आया बूंदी लड्डू भी नहीं ।

कई बैंक भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ये मुफ़्त वाली छड़ी का उपयोग करते हैं । इस तारीख से इस तारीख के बीच इतने रुपयों की फिक्स्ड डिपाजिट करवाएं और आकर्षक ब्याज के अलावा उपहार स्वरुप पाएं एक चांदी का सिक्का "बिल्कुल मुफ़्त"।




अच्छा ये तो छप्पर फाड़ मुफ़्त योजना है । मुफ़्त में यूरो डॉलर बांटने वालों की बात । कई बार आपको भी अपने इ मेल में किसी करोड़पति की मेल मिली होगी जो अपने करोड़ों डॉलर आपको दे के शांति से मरना चाहता है । बदले में आपका नाम, पता, बैंक विवरण इत्यादि मांगता है । कुछ लोग इस झांसे में आके मांगा गया विवरण दे भी देते हैं । मुफ़्त का माल किसे अच्छा नहीं लगता ।

उसके बाद वो भाईसाहब नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करवाते नजर आते हैं "साब, इ मेल वाले ने एक खाता नंबर दिया की इस खाते में पैकिंग, पोस्टेज और हैंडलिंग के खर्चे के लिए 50 हजार रुपये जमा करवा दीजिये, तीन चार दिनों में लाखों डॉलर का पैकेट कूरियर द्वारा आपके घर पहुँच जाएगा । मैं लालच में आ गया था साब । ब्याज पर पैसे ला के मैंने.............। कुछ भी करके मेरे 50 हजार रुपये दिलवा दीजिये साब, डॉलर नहीं चाहिए।"

ये मुफ़्त के माल की दुनिया बड़ी विचित्र और बहुत बड़ी है । हर कोई इस सूत्र का खूब इस्तेमाल करते हैं । चाहे वो गृह वस्तु व्यापारी हो, हवाई कम्पनियां हो, मिठाई वाले या फिर पान भण्डार । मुफ़्त मुफ़्त मुफ़्त का एक चमकीला सा पर्दा दूकान के बाहर लगा के उस कहावत को चरितार्थ कर दिखाने में कामयाब रहते हैं ।

"मुफ़्त का चन्दन, घिस मेरे नंदन"

आप भी मेरे इस लेख को पढ़कर अपने विचार और सुझाव दें और पाएं कल एक नया ताजातरीन लेख । ""बिल्कुल मुफ़्त"" ।

Click here to read वर्माजी की साइकिल - The bicycle of Verma Ji, by Sri Shiv Sharma


जय हिन्द

...शिव शर्मा की कलम से...









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धन्यवाद

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2 comments:

  1. हा हा हा। सही है। अब जैसे आपके ब्लॉग्स को पढ़ने का आंनद भी तो मुफ्त में ही उठा रहे है न हम सब। अद्भुत चित्रण है।धन्यवाद

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