Saturday, 7 November 2015

खोज - Search


खोज - Search for Invention



हम सबने पढ़ा है कि वैज्ञानिक न्यूटन ने जब एक सेब को पेड़ से गिरते देखा तो उन्होंने गुरुत्वाकर्षण की खोज कर दी थी । ऐसे ही समुद्री रास्ते से चलते चलते वास्कोडिगामा कालीकट पहुँच गए थे और भारत की खोज करने का श्रेय पा गए ।

खोज

"खोज या आविष्कार" एक बड़ा ही गूढ़ विषय है । खोजते खोजते इंसान क्या क्या खोज लेता है । कभी कभी तो कई लोग खोज को खोजते खोजते खुद गुम हो जाते हैं, फिर उन्हें ही पहले खोजना पड़ता है ।

 न्यूटन साब ने गुरुत्वाकर्षण खोज निकाला तो एडिसन जी ने बल्ब की खोज कर दी । ग्राहम बैल ने टेलीफोन ढूंढ लिया, किसी ने बिजली, किसी ने मोटर तो किसी ने चुम्बकीय सिद्धांत खोज लिए ।

इन खोजों और आविष्कारों की वजह से छात्र बड़े परेशान रहते हैं । नए पुराने वैज्ञानिकों ने इतनी सारी चीजे खोज निकाली है की परीक्षा के समय याद ही नहीं रहता किसने किसकी खोज की । फिर जब परीक्षा परिणाम आता है तो कई छात्र अपना परिणाम खोजते नजर आते हैं।

अभी चाँद पर पानी खोजा जा रहा है । यानी भविष्य के पाठ्यक्रम में एक और पाठ जुड़ने वाला है, "चन्द्रमा पर पानी की खोज।"

खोज

"आदमी वैसे हमेशा कुछ न कुछ खोज करता ही रहता है।"  एक बार खाली बैठे बैठे "काळू" से जब खोज के विषय में पूछा गया तो उसने बताया "अभी दिवाली की सफाई करते हुए माँ ने पिछले साल गुम हुए मेरे बीस रुपये खोज निकाले, और कल मैंने भी इंटरनेट पर एक गाना खोज निकाला जो मैं कई दिनों से ढूंढ रहा था, मेरे लिए तो ये कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज से भी बड़ी खोज थी भाई, हा हा हा।" काळू ने अपने अंदाज में ही खोज की व्याख्या कर डाली ।


हमारे एक पडौसी जोशीजी तो अक्सर आसमान में एक खोजी नजर लगाये रहा करते थे । पता नहीं क्या ढूंढा करते थे । एक दिन पूछा तो कहने लगे "भगवान को खोज रहा हूं भैयाजी, सब कहते है वो ऊपर रहते हैं, वहीँ से संसार की सारी गतिविधियां संचालित करते हैं।"

एक बार रविवार के दिन हम दोस्त बैठे बातें कर रहे थे । हमारे हैप्पी पाजी भी थे । बात चलते चलते खोज विषय पर आ गयी । सब खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने में लगे थे।  अपना अपना ज्ञान बघार रहे थे । तभी हैप्पी पाजी बोले "ओ यार, इतने ज्ञानी बनते हो तो बताओ, लस्सी की खोज किसने की?" हम सब हंस पड़े और फिर एक रेस्त्रां की खोज करके सबने लस्सी पीयी।

खोज

गंभीरता से सोचें तो इन वैज्ञानिक खोजों या आविष्कारों से मानव जाति को बहुत सारी सुविधाजनक चीजें उपहार स्वरुप मिली है । गर्मी ज्यादा है तो पंखा, एयर कंडीशनर, सर्दी है तो हीटर । बटन दबाओ तो कमरा रौशनी से भर जाता है । समय काटने के लिए टेलीविजन ।

कल्पना कीजिये, अगर पहिये की खोज ना हुयी होती तो, तो दुनिया का आज का दृश्य कैसा होता? आज पूरी दुनिया पहिये पर चल रही है । घड़ी से लेकर गाड़ी, हवाई जहाज तक । ये सब पहिये के बिना कैसे चलते, कल्पना करना भी मुश्किल है ।

राइट बंधुओं ने हवाई जहाज का अविष्कार करके दूरियों को कितने पास ला दिया । घंटों का फासला मिनटों में तय हो जाता है । देशी विदेशी सभी वैज्ञानिक  इन सब के लिए धन्यवाद के पात्र है । क्योंकि हम भी समंदर पार नाइजीरिया से 10-11 घंटे में भारत की शस्य श्यामला धरती पर पहुँच जाते हैं। अगर पानी के जहाज से जाएं तो महीनों लग जाये, तब तक छुट्टियां ही ख़त्म हो जाए ।



अभी भी कई तरह की खोज चल ही रही है । यहां मैं वैज्ञानिक खोजों की नहीं, उनके अलावा होने वाली खोजों के बारे में बात कर रहा हूँ जो निरंतर चल रही है, अनवरत ।

खोज

पत्नियां पतियों के बटुए खोज रही है । पुलिस मुजरिमों को खोज रही है । एक थका हारा आदमी आराम की खोज में है । संत व्यक्ति प्रेम की खोज कर रहे हैं । बीमार स्वास्थ्य को और गरीब रोटी को खोज रहा है।

इन खोजों की सूचि बहुत लंबी है दोस्तों और हो सकता है ये सब एक दिन इन सबको मिल भी जाए । लेकिन जो आदमी इंसान में इंसानियत खोज रहा है, क्या उसकी खोज सफल हो पाएगी?

आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी ।

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जय हिन्द

...शिव शर्मा की कलम से...







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