Thursday, 12 November 2015

शुभ दीपावली - Shubh Deepavali

Deepavali Celebrations in Nigeria

आशा है रौशनी का त्योंहार दीपावली आपने हर्षोल्लास से मनाया होगा । कइयों से गिले शिकवे मिटाये होंगे । कई नए मित्र भी बने होंगे । दीवाली का पर्व है ही रिश्तों में मिठास घोलने का । वैर भाव मिटाने का ।

मिठाईयां भी खूब छक छक के खायी होंगी । भारतीय मिठाइयां होती भी तो बड़ी स्वादिष्ट है । कल्पना मात्र से मुंह में मिठास घुल जाती है ।

जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था मैं अफ्रीका के देश नाइजीरिया में रहता हूं । बहुत से हिंदुस्तानी यहां रहकर अपनी जीविका चलाते हैं । कुछ लोग सपरिवार तो बहुत से भारतीय अकेले ।

जिस कंपनी में मैं काम करता हूं वहां हम सोलह भारतीय हैं । भारत के अलग अलग प्रांतों से, या युं कहूं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी की भारत के चारों कोनों से आये, भारतीय साथ काम करते हैं । यहां ये ही हमारा परिवार है ।

कड़वा सच है की भारत में मारवाड़ी, गुजराती, बिहारी, तमिल, मराठी, पंजाबी इत्यादि बहुतायत में मिल जाते हैं, भारतीय नहीं मिलते । पर यहां सब भारतीय हैं । Indians.

हम सबने भी आज साथ मिलकर दीवाली मनाई । 16 में से आठ सहकर्मी सपरिवार रहते है । सुबह रोज की तरह ही समयानुसार हम कार्यालय आये । पूजा का समय स्थानीय समयानुसार तीन बजे का था । यानि भारतीय समय शाम के साढ़े सात ।

तीन बजे तक हम सब मुख्य कार्यालय में इकट्ठे हो गए । महिलायें भी घरों से आ चुकी थी । रंग बिरंगे परिधानों में बच्चे भी । एक मेला सा लग गया था । मन अति प्रसन्न हो गया था, परदेसी धरती पर देश जैसा माहौल जो हो गया था । सबने एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दी ।

पूजा की तैयारी हम में से एक मित्र ने हर बार की तरह इस बार भी पहले से ही कर के रखी थी सो सब लोग पूजा स्थल पर आ गए और हर्षोल्लास से माँ लक्ष्मी और विघ्नहर्ता श्री गणेश की श्रद्धा से आरती की ।

बच्चे फैक्ट्री के खुले प्रांगण में खेल कूद रहे थे । नाइजीरिया का ये शहर, जो कानो के नाम से जाना जाता है, सहारा रेगिस्थान के काफी करीब है और एक नजर में तो राजस्थान के किसी कस्बे जैसा लगता है । सुनहरी बालू रेत हो तो फिर बच्चे तो मस्ती करेंगे ही और वे कर भी रहे थे ।

आरती के बाद हम सबने मिलकर नाश्ता किया जिसमें डिब्बाबंद बीकानेरी मिठाईयों के अलावा हमारे साथियों की पत्नियों द्वारा घर पर बनाये हुए कुछ पकवान और कुछ फल थे । नाश्ता ख़त्म किया तब तक शाम के पांच बज चुके थे ।

छह बजते बजते सभी गृहणियां अपने अपने घरों के लिए निकल गई । घर में भी दीवाली पूजन की तैयारियों के लिए । हमने भी अपना अपना काम ख़त्म किया और सात सवा सात बजे घर का रुख किया ।

घर आके भगवान की आरती की । घर के बाहर दीये और मोमबत्तीयां जलाकर रौशनी की । थोड़ी फुलझड़ियां जलाकर दीपावली का आनंद लिया । पटाखे चलाना यहां मना है । सो जैसा देश वैसा भेष का नियम अपनाते हुए फुलझड़ियां जलाकर ही खुश हो लिए ।

इन सबसे फ़ारिग होकर आज के दिन के गुजारे पल आप के साथ बांटने को लिखने बैठ गया । और अनायास ही सोचने लगा कि भले ही हम यहां देश परिवार से दूर हैं, मगर फिर भी कितना कुछ है हमारे पास । एक निश्चित समय काम के लिए है तो वहीँ घर पर आकर मनोरंजन के लिए भी समय उपलब्ध है ।

जरा सोचें कि देश की दीवाली को रोशन करने के लिए, सीमा पर हमारे जवान चौबीसों घंटे मुस्तैदी से खड़े रहते हैं । वे भी तो अपने घर परिवार से दूर रहते हैं । दीवाली पर अपनों की याद तो उन्हें भी आती होगी ।

देश के वीर सैनिकों को ससम्मान नमन करते हुए आज के लिए आपसे विदा लेता हूं । पुनः आप सबको दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं ।

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जय हिन्द

...शिव शर्मा की कलम से...


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