Thursday, 5 November 2015

धारावाहिक का अंत - TV Serial Ending


धारावाहिक का अंत - TV Serial Ending

अभी कुछ दिन पहले शाम को घर बैठे मैं और मेरा सहकर्मी टेलीविजन में महाराणा प्रताप वाला धारावाहिक देख रहे थे ।

महारानी अजबदे को नरभक्षी मानव शत्रु का खंजर लग जाता है । प्रताप दौड़ के आते हैं और घायल रानी अजबदे को हाथों में उठाके शयनकक्ष में ले के आते हैं । वैद्यजी को बुलाया जाता है, वैद्यजी कहते हैं मैं अपनी पूरी कोशिश करूँगा महारानी अजबदे को बचाने की । महाराणा प्रताप व्याकुल दिखाई देते हैं और धारावाहिक समाप्त हो जाता है ।

ये जानते हुए भी की जवाब हम दोनों मेंसे किसी के पास नहीं है फिर भी खाना खाते खाते हम इस बात पर चर्चा करने लगे कि अजबदे का क्या होगा? क्या वो बचेगी? या अपने प्राण त्याग देगी ? अब इसके लिए तो सोमवार वाला भाग देखेंगे तभी पता चलेगा ।

हमारी तरह और भी हजारों लोगों के मस्तिष्क में ये सवाल जरूर उठा होगा कि "अब आगे क्या होगा?" कई धारावाहिक प्रेमियों ने तो गूगल पर भी ढूंढा होगा ।

ये सिर्फ इसी धारावाहिक में हुआ हो ऐसा नहीं है, प्रायः हर धारावाहिक में उस दिन का अंत एक राज, एक रहस्य के साथ किया जाता है ताकि दर्शक उस रहस्य को जानने के लिए अगले दिन का भाग भी देखे ।

महाभारत धारावाहिक जब आता था तब दिखाया जाता था की धनुर्धर अर्जुन ने बाण का संधान कर लिया है । होठों से कुछ मंत्र बुदबुदा रहे हैं एवं जैसे ही प्रत्यंचा खींचते शंख की ध्वनि के साथ उस दिन का भाग समाप्त । अब वो बाण अर्जुन ने किस पर और किस दिशा में छोड़ा, उस बाण ने किसका कितना विनाश किया, ये जानने के लिए प्रतीक्षा करें अगले रविवार की ।

रामायण में भी वीर हनुमान जी समुद्र लांघ कर लंका जा रहे हैं माता सीता का पता लगाने । अचानक समुद्र में सुरसा प्रकट होती है और कहती है "मैं तुम्हें अपना आहार बनाऊंगी, मेरे मुंह में आ जाओ।" और बजरंबलि हाथ जोड़ कर कहते हैं "माता अपना मुंह खोलिए" जैसे ही सुरसा अपना मुंह खोलती है दोहा सुनाई पड़ता है,
"जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा,
कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तरा ।"
और फिर, वही शंख ध्वनि तथा धारावाहिक का आज का भाग समाप्त । फिर अगले रविवार की प्रतीक्षा शुरू ।

धन्य है धारावाहिकों के निर्माता निर्देशक । उन्हें दरअसल ये कला आती है की दर्शकों को कैसे बाँध के रखना है । कैसे उनके धारावाहिक का मुफ़्त में प्रचार करवाना है । रहस्य और रोमांच के साथ जब धारावाहिक का एक भाग समाप्त होता है तो गली मोहल्लों, बसों, और मुम्बई महानगरी में लोकल ट्रेन में अगले दिन बातचीत का विषय वही धारावाहिक होगा । सवाल अनेकों होंगे पर जवाब एक ही होगा "अब तो अगला भाग देखेंगे तभी पता चलेगा, कि आखिर वो कौन है, अंत में जिसके जुते दिखाए गए थे ।"

मुझे याद है किशोरावस्था में जब मैं उपन्यास का शौकीन हुआ करता था, तब बहुत सारे उपन्यासों के अंत में लेखक द्वारा प्रायः ये ही लिखा होता था ।

"प्रिय पाठकों, क्षमा करें, इस कहानी को एक ही भाग में समेटने की हमने बहुत चेष्टा की । मगर कहानी की मांग के अनुसार हमें मज़बूरी में इसे दो भागों में प्रस्तुत करना पड़ेगा । अभी भी कहानी में बहुत से सवाल मुंह बाये खड़े हैं। जैसे, क्या अनुराग अपने पिता को क्षमा कर देगा? क्या रौशनी फिर अनुराग से मिल पायेगी? क्या माथुर साहब की फैक्ट्री फिर शुरू हो पायेगी? क्या मनोरमा अपने पति श्रीवास्तव से तलाक ले लेगी? क्या माथुर साहब जान पाएंगे की अनुराग उनका बेटा है? आदि आदि, जानने के लिए इस किताब का दूसरा भाग "आ बेटा फंस" जरूर पढ़ें ।"

अब उस किताब का वो दूसरा भाग आते आते छः महीने लग जाते थे तब तक बेचारे पाठक के दिमाग में सारे सवाल यक्ष प्रश्नों की तरह खड़े रहते थे ।

वो पाठक अपने आपको भाग्यशाली समझते थे जो पहला भाग पढ़ते तब तक दूसरा भाग भी बाजार में आ चूका होता था ।

धारावाहिक में कम से कम पिछले दिन का राज अगले दिन खुल तो जाता है । हां , ये अलग बात है की अगले दिन वो धारावाहिक फिर एक नया राज दिमाग में उथल पुथल मचाने के लिए छोड़ जाता है ।

इन धारावाहिकों, उपन्यासों से उपजे कुछ सवालों के जवाब समयोपरांत मिल गए थे, मगर कुछ के अभी भी बाकि है । क्योंकि किसी कारणवश या तो मैं धारावाहिक का अगला भाग नहीं देख पाया था, और या वो उपन्यास का दूसरा भाग लेना, पढ़ना भूल गया था ।

मगर अभी तो ताजा ताजा एक ही रहस्य रह रह के दिमाग में तूफ़ान मचा रहा है । सारा देश इस प्रश्न के उत्तर को तलाश रहा है । किसी को कुछ पता नहीं है। हर कोई एक दूसरे से पूछ रहा है। अब अगर आपमें से किसी को पता हो तो मुझे भी जरूर बताइयेगा, कि "आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा।"

अंत में होठो पर मुस्कान लिए आप सबसे आज के लिए विदा लेता हूँ । कल फिर मुलाकात होगी ।

Please read आशीर्वाद - Blessings

जय हिन्द

...शिव शर्मा की कलम से...




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